लखीमपुर खीरी। लखीमपुर खीरी का ऐतिहासिक दशहरा मेला अपनी भव्यता और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए विशेष पहचान रखता है। मेले का विश्व प्रसिद्ध कवि सम्मेलन भी हर वर्ष साहित्य प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र रहता है। इस कवि सम्मेलन में शामिल होने के लिए आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रोता पहुंचते हैं। इस वर्ष आयोजित ‘न भूतों न भविष्यति’ कवि सम्मेलन में भी हास्य, ओज, गीत और संवेदनशील कविताओं की ऐसी छटा बिखरी कि श्रोता पूरी रात साहित्यिक रस में सराबोर रहे।
4 नवंबर की रात 9 बजे शुरू हुआ यह कवि सम्मेलन 5 नवंबर की सुबह 5 बजकर 10 मिनट तक चला। पूरी रात कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को बांधे रखा और सभागार में बार-बार तालियों की गूंज सुनाई देती रही।
नगरपालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव के साहित्य और काव्य के प्रति अनुराग की सराहना की गई। वहीं, अधिशासी अधिकारी श्री संजय कुमार ने श्रेष्ठ कवियों की टीम को आमंत्रित कर इस आयोजन को यादगार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रधान सर्वेश अस्थाना के नेतृत्व में देश के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। कवि सम्मेलन में डॉ. विष्णु सक्सेना, प्रताप फौजदार, डॉ. कीर्ति काले, डॉ. प्रवीण शुक्ल, महेश श्रीवास्तव, अजय अंजाम, डॉ. सोनरूपा विशाल, गजेंद्र प्रियांशु, सुनील व्यास, विकास बौखल, अभय सिंह निर्भीक और सौरभकान्त शर्मा ने प्रभावशाली काव्यपाठ किया।
कवि सम्मेलन का विशेष आकर्षण गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना की प्रस्तुति रही। श्रोताओं ने लगभग डेढ़ घंटे तक उनके गीतों और कविताओं का आनंद लिया। उनकी रचनाओं पर श्रोता झूमते रहे और तालियों से लगातार उत्साहवर्धन करते रहे।
कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. प्रवीण शुक्ल ने किया। उनकी प्रभावशाली मंच संचालन शैली ने पूरे आयोजन को जीवंत बनाए रखा। वहीं, सरस्वती वंदना के स्थान पर आयोजित वाणी वंदना डॉ. कीर्ति काले ने प्रस्तुत की, जिससे कार्यक्रम का शुभारंभ साहित्यिक गरिमा के साथ हुआ।
इस अवसर पर लखीमपुर खीरी के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ओज कवि आशीष अनल की विशेष उपस्थिति भी रही। उनकी मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
दशहरा मेले के इस कवि सम्मेलन ने एक बार फिर साबित किया कि साहित्य और कविता के प्रति लोगों का आकर्षण आज भी उतना ही गहरा है। रातभर चले इस आयोजन में श्रोताओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने इसे यादगार बना दिया। ‘न भूतों न भविष्यति’ नाम के अनुरूप यह कवि सम्मेलन अपनी शानदार प्रस्तुतियों और साहित्यिक माहौल के कारण लंबे समय तक याद किया जाएगा।