गिरधर खरे
समन्वयक उ.प्र.
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UP Sahitya Sabha Trust
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा
हिन्दी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संवर्धन के लिए समर्पित एक प्रदेशव्यापी संस्था — जो जिला इकाइयों, लेखकों और पाठकों को एक सूत्र में जोड़ती है।
हिन्दी साहित्य, संस्कृति और समाज की सेवा में समर्पित
54
जिला इकाइयाँ
732+
सक्रिय सदस्य
3
केंद्रीय समितियाँ
हिन्दी साहित्य, संस्कृति और समाज की सेवा में समर्पित
— उत्तर प्रदेश साहित्य सभा
ABOUT US
प्रदेश भर के साहित्यकारों, शोधार्थियों और पाठकों को संगठित करने वाली यह स्वयंसेवी संस्था जिला इकाइयों और केंद्रीय कार्यकारिणी के माध्यम से हिन्दी लेखन, आयोजनों और साहित्यिक संवाद को निरंतरता देती है — गाँव की पाठशाला से लेकर विश्वविद्यालय तक।
FOUNDER
संस्थापक / प्रधान, उत्तर प्रदेश साहित्य सभा
सर्वेश अस्थाना हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि, लेखक और व्यंग्यकार हैं, जिन्हें उनकी हास्य-व्यंग्य रचनाओं के लिए "स्माइल मैन" के नाम से जाना जाता है। तीन दशकों से अधिक समय से कवि सम्मेलनों में सक्रिय, वे हास्य, व्यंग्य, गजल एवं बाल कविता सहित लगभग एक दर्जन पुस्तकों के रचयिता हैं। वे साहित्यगंधा के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं।
12+
पुस्तकें
2016
यश भारती
35+
वर्ष कवि सम्मेलन
हिन्दी भाषा के प्रयोग और शुद्धता को शिक्षा तथा जनसंवाद में बढ़ावा देना।
नई और स्थापित रचनाधर्मिता को मंच, प्रकाशन और सम्मान के अवसर देना।
दुर्लभ रचनाओं, पांडुलिपियों और साहित्यिक विरासत का दस्तावेज़ीकरण व संरक्षण।
प्रदेश के हर जिले में सक्रिय इकाइयों के माध्यम से साहित्यिक समुदाय का निर्माण।
EXECUTIVE COMMITTEE
प्रदेश स्तर पर सभा का नेतृत्व करने वाली केंद्रीय कार्यकारिणी।
समन्वयक उ.प्र.
अध्यक्ष
वरिष्ठ उपाध्यक्ष
उपाध्यक्ष
उपाध्यक्ष
LITERARY VOICES
प्रदेश के विभिन्न जनपदों से जुड़े साहित्यकार / सदस्य।
सह सचिव · देवरिया
कार्यकारिणी सदस्य · बस्ती
सदस्य कार्यकारिणी · इटावा
कार्यकारिणी सदस्य · गाज़ियाबाद
प्रचार सचिव · श्रावस्ती
ACTIVITIES
साहित्यिक आयोजनों से लेकर दीर्घकालीन परियोजनाओं तक, सभा के कार्यों की झलक।
EVENTS
BOOK STORE
उत्तर प्रदेश की साहित्यिक विरासत, शोध ग्रंथ, संचयन और समकालीन रचनाओं से जुड़ी चुनिंदा पुस्तकों का आधिकारिक संग्रह — शीघ्र उपलब्ध।
LATEST NEWS
वाराणसी
बालको! तुमने राजाओं और वीरों की कहानियां बहुत सुनी होंगी, लेकिन किसी कुत्ते की जीवन-कथा शायद ही सुनी हो। कुत्तों के जीवन में ऐसी बात ही कौन-सी होती है, जो सुनाई जा सके। न वह देवों से लड़ता है, न परियों के देश में जाता है, न बड़ी-बड़ी लड़ाइयां जीतता है; इसलिए भय है कि कहीं तुम मेरी कहानी को उठाकर फेंक न दो। किंतु मैं तुम्हें विश्वास दिलाता हूं कि मेरे जीवन में ऐसी कितनी ही बातें हुई हैं, जो बड़े-बड़े आदमियों के जीवन में भी न हुई होंगी...
VIDEO ARCHIVE
अभी कोई वीडियो प्रकाशित नहीं है
सभा के आयोजनों की वीडियो झलकियाँ शीघ्र यहाँ जोड़ी जाएँगी।
GALLERY
MEMBERSHIP
उत्तर प्रदेश के साहित्यिक और सांस्कृतिक जीवन से जुड़िए। सदस्य बनकर साहित्य के प्रचार-प्रसार और लोक भाषाओं के संरक्षण में योगदान दें।